गेंद को अपनी उंगलियों में फंसा कर, सबसे शांत रन-अप के साथ क्रीज़ पर बॉलींग करने के लिए पहुंचता बॉलर। अपनी पूरी ताकत गेंद को ज्यादा से ज्यादा रोटेट कर देने में लगा देने वाला बॉलर। आपको याद तो होगा ही लगान फिल्म में गोली बॉलींग करते समय कांखता था। ठीक उसी तरह ये बॉलर भी रोटेशन देने के चक्कर में इतनी ताकत झोंक देता था कि गेंद फेंकते वक़्त कांख देता था।“हुंह!” वैसे ही जैसे मारिया शारापोवा बैक हैंड मारते वक्त कांखती है. “हुंह’’
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(image facebook)
साल भर पहले अपना पहला टेस्ट मैच खेलकर सामने आए शेन वार्न। अपनी पहली ऐशेज़ सीरीज़ खेल रहे थे। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की टीम मैदान पर और इंग्लैंड बैटिंग कर रही थी। ये पहला ऐशेज़ टेस्ट था। इंग्लैंड के ऐथरटन आउट ही हुए थे और इंग्लैण्ड का स्कोर था 71। ऐथरटन 19 पर आउट हो गए। गैटिंग ने आते ही ग्यारह गेंदों में एक चौका मारा।
ऐशेज़ का मतलब
ऐशेज़ का मतलब अगर आपको मालूम ही नहीं हो तो बता दूं कि इंडिया वर्सेज़ पाकिस्तान को आप एक ब्रैकेट में रखें और उसे हज़ार से गुणा कर दें।
खूबसूरत बैडमिंटन खिलाड़ी
स्पिनर्स का कत्ल करने के लिए मैदान में नजर आने वाले माइक गैटिंग क्रीज पर थे और बॉलिंग स्ट्राइक पर शेन वार्न। अंग्रेजों की सरज़मीं पर शेन वार्न की पहली लाल गेंद शेन के हाथों में घूम रही थी। एक लेग स्पिनर के लिए वही ऑर्थोडॉक्स फ़ील्ड। दुनिया का सबसे शांत, सबसे सौम्य रन अप। सात कदम क्रीज़ तक अंग्रेजी ज़मीन पर पहले सात कदम। किसी को कुछ नहीं मालूम था आगे क्या होना है।
अपनी सारी ताकत क्रीज़ पर आते ही रोटेशन में झोंक दी जाती थी। शेन की गेंद लेग स्टंप के बाहर गिरी। गैटिंग सीधे हाथ के बल्लेबाज थे। इसके बाद शेन ने रोटेशन के लिए अंगुलियों को इतना ज़्यादा ज़ोर दिया था कि गेंद नॉर्मल से कहीं ज़्यादा घूम रही थी। ड्रिफ्ट और रोटेशन ने ऐसा कमाल किया कि गेंद लेग स्टंप के बाहर गिरी। जिसकी वजह से गैटिंग ने अपना पैर खोल लेग स्टंप की लाइन के भी बाहर ला दिया और गेंद टप्पा खाते ही घूम गयी।